कोटा जिले में मुकुंदरा-चेचट टनल को लेकर नई परेशानी सामने आई है। मानसून की बारिश के दौरान टनल के अंदर करीब 2 से 3 फीट तक पानी जमा हो गया। पानी भरने के कारण कुछ समय के लिए यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई और इस बड़े प्रोजेक्ट की ड्रेनेज व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, बारिश के दौरान टनल की दीवारों से भी पानी रिसता दिखाई दिया। हालात ऐसे बने कि टनल के भीतर पानी निकालने के लिए लगाए गए पंपिंग सिस्टम पर भी दबाव बढ़ गया। इसके चलते टनल की जल निकासी व्यवस्था को लेकर तकनीकी स्तर पर सवाल खड़े हुए हैं।
मुकुंदरा-चेचट टनल करीब 1100 करोड़ रुपये की लागत वाली महत्वपूर्ण परियोजना है। इसका उद्देश्य क्षेत्र में आवागमन को सुगम बनाना और पुराने मार्ग की तुलना में यात्रा को अधिक सुविधाजनक बनाना है। परियोजना का निर्माण आधुनिक तकनीक से किया गया है, लेकिन पहली अच्छी मानसूनी बारिश में जलभराव की स्थिति सामने आने से इसकी उपयोगिता और रखरखाव पर चर्चा शुरू हो गई है।

स्थिति सामने आने के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की ओर से पानी की निकासी की क्षमता बढ़ाने की दिशा में काम किए जाने की जानकारी सामने आई है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतनी बड़ी परियोजना के डिजाइन में बारिश के पानी की निकासी को किस तरह ध्यान में रखा गया था और भारी बारिश की स्थिति के लिए व्यवस्था पर्याप्त क्यों साबित नहीं हुई।
कोटा और आसपास के लोगों के लिए यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि टनल क्षेत्र में भारी बारिश के दौरान जलभराव सीधे यातायात और सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है। आने वाले मानसून में इस तरह की समस्या दोबारा न हो, इसके लिए ड्रेनेज सिस्टम को मजबूत करना जरूरी माना जा रहा है।
