जयपुर : राजस्थान की राजनीति अब विधानसभा की सीमाओं से निकलकर शहरों और कस्बों की गलियों तक पहुंचने लगी है। प्रदेश में लंबे समय से प्रतीक्षित नगरीय निकाय चुनाव की तैयारियां अब निर्णायक दौर में प्रवेश कर चुकी हैं। राज्य के 41 जिलों की 309 नगरीय निकायों में चुनाव प्रस्तावित हैं। इनमें नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिकाएं शामिल हैं।

सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव अब आरक्षण प्रक्रिया है। 13 अगस्त को होने वाली लॉटरी के बाद यह काफी हद तक स्पष्ट हो जाएगा कि कौन-सा वार्ड और कौन-सा निकाय प्रमुख पद किस वर्ग के लिए आरक्षित होगा। इसके बाद राजनीतिक दलों और स्थानीय स्तर पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे दावेदारों की रणनीति तेजी से बदल सकती है।
राज्य निर्वाचन व्यवस्था के मुताबिक निकाय चुनाव दो चरणों में कराने की तैयारी है। प्रस्तावित व्यवस्था में पहले चरण में 140 निकायों के 5,050 वार्ड और दूसरे चरण में 169 निकायों के 5,195 वार्ड शामिल होंगे। कुल मिलाकर लगभग 18 हजार मतदान केंद्रों की व्यवस्था प्रस्तावित है।
13 अगस्त को खुलेगा आरक्षण का पिटारा
निकाय चुनाव की पूरी तस्वीर में इस समय सबसे ज्यादा चर्चा आरक्षण को लेकर है। 13 अगस्त को होने वाली प्रक्रिया के बाद नगर निगमों के महापौर, नगर परिषदों के सभापति, नगर पालिकाओं के अध्यक्ष और वार्डों की आरक्षण स्थिति सामने आएगी।
आरक्षण तय होते ही कई संभावित उम्मीदवारों की चुनावी गणित बदल जाएगी। जिन वार्डों में सामान्य वर्ग के दावेदार तैयारी कर रहे हैं, वहां आरक्षण बदलने पर उन्हें दूसरे वार्ड का रुख करना पड़ सकता है। इसी तरह महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य आरक्षित वर्गों के संभावित उम्मीदवारों की सक्रियता बढ़ेगी।
ओबीसी आरक्षण को लेकर भी लंबे समय से प्रक्रिया चल रही थी। ओबीसी आयोग की रिपोर्ट चुनावी आरक्षण की तस्वीर तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
