मॉस्को/कीव: रूस-यूक्रेन युद्ध के खार्किव फ्रंट पर तनाव और बढ़ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेनी राष्ट्रपति व्लादिमिर जेलेंस्की की प्रस्तावित मुलाकात से ठीक पहले रूस ने दावा किया है कि उसकी सेना ने खार्किव क्षेत्र के रणनीतिक शहर कुप्यांस्क पर पूर्ण नियंत्रण हासिल कर लिया है। रूसी रक्षा मंत्रालय के अनुसार पश्चिमी सैन्य समूह की 6वीं गार्ड्स संयुक्त हथियार सेना ने शहर को अपने कब्जे में ले लिया है और शेष यूक्रेनी बलों को खदेड़ने की कार्रवाई जारी है।
रूसी मंत्रालय की दैनिक ब्रीफिंग में कहा गया कि बीते 24 घंटों में यूक्रेनी सेना ने कुप्यांस्क में तीन बार घुसपैठ की कोशिश की, लेकिन हर प्रयास को नाकाम कर दिया गया। रूसी सैनिक इमारतों और बेसमेंट्स में छिपे छोटे-छोटे यूक्रेनी समूहों को निशाना बना रहे हैं। एक रूसी कंपनी कमांडर ने दावा किया कि शहर में अब केवल बिखरे हुए यूक्रेनी दस्ते ही बचे हैं। कुप्यांस्क रेल और सड़क नेटवर्क का अहम केंद्र माना जाता है, जिससे इसकी रणनीतिक अहमियत और बढ़ जाती है।
रूस इससे पहले नवंबर 2025 में भी कुप्यांस्क पर कब्जे का दावा कर चुका है। उस समय रूसी जनरल वालेरी गेरासिमोव ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को इस संबंध में जानकारी दी थी और 27वीं ब्रिगेड व 1486वीं रेजिमेंट को “मुक्ति” का श्रेय दिया गया था। हालांकि दिसंबर में हालात बदल गए। स्वतंत्र विश्लेषकों और रूसी मिलब्लॉगर्स के मुताबिक यूक्रेनी काउंटरअटैक से रूसी बलों को नुकसान हुआ और शहर के बड़े हिस्से पर उनका नियंत्रण कमजोर पड़ गया।
इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर (ISW) की रिपोर्ट्स में बताया गया कि यूक्रेनी सेना ने शहर के उत्तरी और पश्चिमी इलाकों में बढ़त बनाई, सप्लाई लाइनों को बाधित किया और दिसंबर के मध्य तक कुप्यांस्क के लगभग 90 प्रतिशत हिस्से पर नियंत्रण का दावा किया। उस दौरान रूसी बल ओस्किल नदी के पूर्वी तट तक सीमित बताए गए थे।
अब रूस के नए दावे पर यूक्रेन ने शहर में भीषण लड़ाई जारी रहने की पुष्टि की है, लेकिन विस्तृत जानकारी साझा नहीं की। कुछ रिपोर्ट्स में रूसी बयान को प्रचार बताया जा रहा है, जबकि जमीनी हालात को लेकर तस्वीर अब भी साफ नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि कुप्यांस्क पर नियंत्रण युद्ध की दिशा को प्रभावित कर सकता है, लेकिन दोनों पक्षों के विरोधाभासी दावों के बीच स्वतंत्र सत्यापन कठिन बना हुआ है। इस अनिश्चितता ने क्षेत्र में मानवीय संकट की आशंकाओं को और बढ़ा दिया है।
