महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार की विमान दुर्घटना में मौत के बाद नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने हादसे से जुड़ी अहम जानकारी साझा की है। मंत्रालय ने गुरुवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के उस पत्र का जवाब दिया, जिसमें उन्होंने बारामती में हुए घातक विमान हादसे का विस्तृत विवरण मांगा था। सरकार ने अपने जवाब में स्पष्ट किया कि विमान का ब्लैक बॉक्स बरामद कर लिया गया है और उसे सुरक्षित रखकर जांच के लिए भेज दिया गया है।
मंत्रालय के अनुसार, दुर्घटनास्थल से मिले सभी तकनीकी रिकॉर्ड, परिचालन से जुड़े दस्तावेज़ और अन्य तथ्यों की बारीकी से जांच की जा रही है, ताकि हादसे की पूरी कड़ी और उसके वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके। विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) ने औपचारिक जांच शुरू कर दी है, जो पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक उपायों पर भी विचार किया जा रहा है।
ब्लैक बॉक्स को विमान हादसों की जांच में सबसे अहम साक्ष्य माना जाता है, क्योंकि इसमें उड़ान से जुड़ा महत्वपूर्ण डेटा रिकॉर्ड रहता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे पायलट के फैसलों, तकनीकी स्थिति और अंतिम क्षणों की जानकारी मिलती है।
बुधवार सुबह बारामती में हुए इस हादसे में लीयरजेट-45 विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसमें उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के साथ उनके सुरक्षा अधिकारी विदिप जाधव, पायलट-इन-कमांड कैप्टन सुमित कपूर, फर्स्ट ऑफिसर कैप्टन शम्भावी पाठक और फ्लाइट अटेंडेंट पिंकी माली की मौत हो गई।
DGCA के अहम खुलासे:
नागरिक उड्डयन मंत्रालय और DGCA द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, दुर्घटना से ठीक पहले विमान चालक दल और ज़मीन पर मौजूद एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) के बीच संवाद हुआ था। विमान ने बारामती हवाई अड्डे पर दो बार उतरने का प्रयास किया। यह हवाई अड्डा “अनियंत्रित” श्रेणी में आता है, जहां नियमित ATC व्यवस्था नहीं है।
जांच में सामने आया है कि चालक दल ने पहले रनवे दिखाई न देने की बात कही थी, लेकिन कुछ देर बाद रनवे से दृश्य संपर्क होने की पुष्टि की गई। इसके बाद सुबह 8:43 बजे लैंडिंग की अनुमति दी गई। हालांकि, अनुमति मिलने के लगभग एक मिनट बाद ही ATC ने विमान को आग की लपटों में घिरते देखा।
DGCA सूत्रों के मुताबिक, जांच का मुख्य फोकस इस सवाल पर है कि कम दृश्यता के बावजूद लैंडिंग की कोशिश क्यों की गई। उड़ान के रवाना होने के समय दृश्यता 3 से 5 किलोमीटर के बीच बताई गई थी, जिसे अब हादसे की एक अहम कड़ी माना जा रहा है।
