Rajasthan Legislative Assembly के मौजूदा सत्र में सदन की गरिमा, अनुशासन और कोरम को लेकर तीखी चर्चा देखने को मिली। प्रश्नकाल शुरू होते ही सदन में आवश्यक सदस्यों की संख्या पूरी न होने (कोरम) का मुद्दा उठा, जिस पर स्पीकर Vasudev Devnani ने सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को कड़ी नसीहत दी।
स्पीकर ने जताई नाराजगी
कार्यवाही की शुरुआत में जब कोरम पूरा नहीं होने की बात सामने आई, तो स्पीकर ने स्पष्ट कहा कि सदन को सुचारु रूप से चलाना सभी सदस्यों की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने दोनों पक्षों के सचेतकों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने सदस्यों की उपस्थिति सुनिश्चित करें। उल्लेखनीय है कि एक दिन पहले भी कोरम का मुद्दा उठा था।
विपक्ष के सचेतक ने सदन में कम उपस्थिति पर सवाल उठाया। इस पर सत्ता पक्ष की ओर से कहा गया कि विपक्ष के सदस्य भी अक्सर अनुपस्थित रहते हैं। बढ़ती बहस के बीच स्पीकर ने हस्तक्षेप करते हुए स्पष्ट किया कि यह हिदायत दोनों पक्षों पर समान रूप से लागू होती है।
जोगाराम पटेल के सुझाव पर हल्का तंज
संसदीय कार्य मंत्री ने सुझाव दिया कि जो सदस्य सदन में उपस्थित नहीं रहते, उनके वक्तव्य को कार्यवाही से हटा दिया जाए। इस पर स्पीकर ने हल्के अंदाज में कहा, “मुझे इस बात की पावर दे दीजिए, अगर आप सभी सहमत हों तो?” उनके इस टिप्पणी पर सदन में हल्की मुस्कान का माहौल बना, जिसके बाद कार्यवाही आगे बढ़ी।
क्या है कोरम का प्रावधान?
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 189(3) के अनुसार, विधानसभा की कार्यवाही चलाने के लिए कुल सदस्यों की संख्या का दसवां हिस्सा या कम से कम 10 सदस्य (स्पीकर सहित) उपस्थित होना आवश्यक है, जो भी संख्या अधिक हो। यदि कोरम पूरा नहीं होता, तो सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ती है।
