राजस्थान शिक्षा विभाग ने कक्षा 9वीं से 12वीं तक पढ़ाई जाने वाली चार पुस्तकों को पाठ्यक्रम से हटाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। विभाग ने इन किताबों को विलोपित श्रेणी में शामिल करते हुए स्कूलों में इनके पढ़ाने और छात्रों के पढ़ने पर रोक लगा दी है। इस संबंध में शिक्षा विभाग के निदेशक सीताराम जाट ने आधिकारिक आदेश जारी किया है, जिसमें संबंधित पुस्तकों के नाम स्पष्ट रूप से दर्ज किए गए हैं।
हटाई गई पुस्तकों में कक्षा 9, 10, 11 और 12 की एक-एक किताब शामिल है। ये सभी पुस्तकें राजस्थान के इतिहास, संस्कृति, स्वतंत्रता आंदोलन और आजादी के बाद के भारत के स्वर्णिम दौर से जुड़ी हुई थीं।
इनमें कक्षा 9 की ‘राजस्थान का स्वतंत्रता आंदोलन एवं शौर्य परंपरा’, कक्षा 10 की ‘राजस्थान का इतिहास एवं संस्कृति’, कक्षा 11 की ‘आजादी के बाद का स्वर्णिम भारत’ और कक्षा 12 की ‘आजादी के बाद का स्वर्णिम भारत भाग-2’ शामिल हैं। ये पुस्तकें हिंदी और अंग्रेजी दोनों माध्यम में उपलब्ध थीं।
शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों को निर्देश दिया है कि इन पुस्तकों को अब पढ़ाई में शामिल न किया जाए। साथ ही विद्यार्थियों को भी इन्हें न पढ़ने की सलाह दी गई है।
गौरतलब है कि शिक्षा मंत्री Madan Dilawar पहले भी इतिहास की किताबों को लेकर आपत्ति जता चुके हैं। उन्होंने विशेष रूप से राजस्थान के इतिहास, मुगलों से जुड़े अध्यायों और आजादी के बाद के घटनाक्रम के वर्णन पर सवाल उठाए थे।
