अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) जैसे देश के प्रमुख स्वास्थ्य संस्थानों में डॉक्टरों के इस्तीफों का सिलसिला चिंताजनक स्तर पर पहुंच गया है। संसद में पेश आंकड़ों के मुताबिक, पिछले तीन वर्षों (2022-2024) में देशभर के AIIMS से कुल 429 फैकल्टी सदस्यों ने इस्तीफा दिया है। इनमें से 25 इस्तीफे जोधपुर AIIMS से और 52 इस्तीफे एम्स नई दिल्ली से हुए हैं।
राज्यसभा में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने बताया कि इन इस्तीफों के पीछे व्यक्तिगत और पेशेवर दोनों तरह के कारण रहे हैं, हालांकि मंत्रालय ने इन कारणों का विस्तार से खुलासा नहीं किया है और न ही इस विषय पर कोई राष्ट्रीय अध्ययन कराया गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों से डॉक्टरों का निजी क्षेत्र की ओर रुख करना कार्य परिस्थितियों, करियर विकास और वेतनमान जैसे मुद्दों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उनका मानना है कि स्टाफ को बनाए रखने के लिए ठोस नीतिगत हस्तक्षेप और बेहतर कार्य वातावरण की जरूरत है।
एम्स, जिसे विश्वस्तरीय चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के उद्देश्य से स्थापित किया गया था, भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है। लेकिन अनुभवी फैकल्टी का लगातार नुकसान शिक्षण, शोध और मरीजों की देखभाल की गुणवत्ता पर नकारात्मक असर डाल सकता है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि स्थिति पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो यह रुझान और गंभीर हो सकता है।