एमपी लैड फंड को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद संजना जाटव ने आरोप लगाया है कि केवल कांग्रेस ही नहीं, बल्कि भाजपा सांसद भी अपने संसदीय क्षेत्र से बाहर, दूसरे राज्यों में सांसद निधि का इस्तेमाल कर चुके हैं। उनका कहना है कि इस मुद्दे पर एकतरफा आरोप लगाना सही नहीं है।
संजना जाटव ने कहा कि राजस्थान से राज्यसभा सांसद और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने पंजाब के जालंधर, अमृतसर और करनाल में विकास कार्यों के लिए एमपी लैड फंड से धनराशि देने की सिफारिश की है। इसके अलावा सांसद चुन्नीलाल गरासिया और राजेंद्र गहलोत ने भी अपने निर्वाचन क्षेत्र से बाहर उत्तर प्रदेश में सांसद निधि का उपयोग किया है।
इस मामले में चुन्नीलाल गरासिया ने उत्तर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में जनहित और जन-उपयोगी कार्यों के लिए सांसद निधि से राशि देने की सिफारिश करने की बात स्वीकार की। उन्होंने कहा कि नियमों के तहत सांसद सालाना 50 लाख रुपये तक दूसरे राज्यों में भी विकास कार्यों के लिए दे सकते हैं।
वहीं, संजना जाटव ने हरियाणा के कैथल में राशि देने के सवाल पर सफाई देते हुए कहा कि राज्यसभा सांसद रणदीप सुरजेवाला ने उनके संसदीय क्षेत्र भरतपुर के लिए एक करोड़ रुपये का फंड दिया है। हालांकि, इस पर यह सवाल भी उठ रहा है कि सुरजेवाला राजस्थान से ही राज्यसभा सांसद हैं, इसलिए वे राज्य के भीतर कहीं भी विकास कार्यों की अनुशंसा कर सकते हैं।
इस पूरे विवाद के बीच संजना जाटव और सांसद राहुल कस्वां का कहना है कि उन्होंने सभी सिफारिशें नियमों के अनुसार की हैं। दोनों नेताओं ने बताया कि केंद्र सरकार ने हाल ही में सांसद निधि के नियमों में संशोधन किया है। पहले दूसरे राज्य में सांसद निधि खर्च करने की सीमा कुल निधि के 5 प्रतिशत तक थी, जिसे अब बढ़ाकर सालाना 50 लाख रुपये कर दिया गया है। यह संशोधन 13 अगस्त 2024 से लागू हो चुका है।
