जयपुर: राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मंगलवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अयोध्या के राम मंदिर निर्माण से जुड़े कई अहम पहलुओं पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि मंदिर निर्माण के दौरान राजस्थान के भरतपुर स्थित बंसी पहाड़पुर से पत्थर भेजे जा रहे थे और इसी दौरान उन्होंने मंदिर निर्माण समिति के महासचिव चंपत राय से अवैध खनन को लेकर विशेष आग्रह किया था।
गहलोत ने कहा कि दिल्ली में हुई मुलाकात के दौरान उन्होंने चंपत राय से स्पष्ट कहा था कि राम मंदिर जैसा पवित्र निर्माण कार्य हो रहा है, इसलिए इसमें अवैध खनन से निकले पत्थरों का उपयोग नहीं होना चाहिए। उन्होंने आग्रह किया कि केवल कानूनी रूप से खनन किए गए पत्थरों का ही इस्तेमाल किया जाए, क्योंकि उस समय बंसी पहाड़पुर क्षेत्र में अवैध खनन की शिकायतें सामने आ रही थीं।
पीएमओ तक पहुंचा मामला
पूर्व मुख्यमंत्री ने बताया कि यह मामला बाद में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) तक पहुंचा। इसके बाद राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने उनसे संपर्क किया। गहलोत के अनुसार, उन्होंने पूरी स्थिति से उन्हें अवगत कराया और सुझाव दिया कि जिस क्षेत्र से पत्थर लिए जाने हैं, उसे वन क्षेत्र की बाधाओं से मुक्त कराया जाए ताकि कानूनी तरीके से खनन संभव हो सके।
उन्होंने कहा कि राम मंदिर निर्माण जैसे महत्वपूर्ण और धार्मिक कार्य को देखते हुए आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी की गई और संबंधित क्षेत्र को वन क्षेत्र की बाधाओं से बाहर किया गया। इससे निर्माण कार्य बिना किसी कानूनी अड़चन के आगे बढ़ सका। गहलोत ने दावा किया कि इस सहयोग के लिए उनकी सरकार को धन्यवाद भी दिया गया था।
चढ़ावे को लेकर उठे विवाद पर भी बोले
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान गहलोत ने राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर सामने आए विवाद का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यदि इतने पवित्र कार्य से जुड़े मामलों में किसी प्रकार की अनियमितता या वित्तीय गड़बड़ी के आरोप लगते हैं, तो इससे करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचती है और पूरे देश में अविश्वास का माहौल बनता है।
BJP-RSS और VHP पर लगाए आरोप
अशोक गहलोत ने आरोप लगाया कि BJP, RSS और VHP ने मिलकर मंदिर ट्रस्ट का गठन किया, लेकिन जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की। उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रकार की अनियमितताओं की जानकारी पहले से थी, तो समय रहते कार्रवाई होनी चाहिए थी। गहलोत के अनुसार, ऐसे मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे।
