ढाका: बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के राजनीतिक जीवन का सबसे बड़ा फैसला अगले 24 घंटे में आने वाला है। अंतरिम यूनुस सरकार ने हसीना के लिए कोर्ट से मौत की सजा की मांग की है, जिसके बाद देशभर में सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। आशंका जताई जा रही है कि यदि अदालत ने सख्त फैसला सुनाया तो बांग्लादेश में हालात अचानक बिगड़ सकते हैं।

सोमवार को विशेष ट्रिब्यूनल सुनाएगा फैसला
78 वर्षीय हसीना के खिलाफ यह मामला पिछले साल हुए एंटी-गवर्नमेंट प्रदर्शनों के दौरान कथित मानवता-विरोधी अपराधों से जुड़ा है। बांग्लादेश का इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT-BD) सोमवार को लंबी सुनवाई के बाद अपना फैसला सुनाएगा।
ट्रिब्यूनल में 28 कार्य दिवसों तक चली सुनवाई में 54 गवाहों ने बयान दिया।
हसीना के अलावा कई बड़े नाम आरोपी
इस मामले में पूर्व गृह मंत्री आसदुज्जमान खान कमाल और पुलिस महानिदेशक रहे चौधरी अब्दुल्लाह अल-मामून पर भी हत्या, हत्या के प्रयास, यातना और अन्य अमानवीय कृत्यों के आरोप लगे हैं।
कमाल और हसीना पर अनुपस्थिति में मुकदमा चला और उन्हें भगोड़ा घोषित किया गया।
पूर्व IGP मामून हालांकि राज्य गवाह बन चुके हैं, और मामले में सरकारी पक्ष को मजबूती दे रहे हैं।
जुलाई विद्रोह में 1,400 लोगों की मौत का आरोप
संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार, 15 जुलाई से 15 अगस्त 2024 के बीच हुए छात्र-नेतृत्व वाले “जुलाई विद्रोह” पर कार्रवाई के दौरान 1,400 तक लोगों की मौत हुई, जिसके आदेश देने का आरोप सीधे शेख हसीना पर है।
मुख्य अभियोजक मोहम्मद ताजुल इस्लाम ने हसीना के लिए मृत्युदंड की मांग की है, उन्हें इन हिंसक कार्रवाइयों की “मुख्य साजिशकर्ता” बताते हुए।
भारत में शरण, प्रत्यर्पण की मांग
5 अगस्त 2024 को सत्ता से बेदखल होने के बाद शेख हसीना बांग्लादेश छोड़कर भारत पहुंच गई थीं। इंटरिम सरकार ने भारत से उनका प्रत्यर्पण मांगा है, जिस पर अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
हसीना ने ट्रिब्यूनल को बताया ‘कंगारू कोर्ट’
विभिन्न इंटरव्यू में हसीना ने ICT-BD को राजनीतिक साजिश बताते हुए कहा है कि यह ट्रिब्यूनल उनके विरोधियों द्वारा नियंत्रित है।
लंदन की कानूनी फर्म डाउटी हाउस चैंबर्स ने भी UN में शिकायत दर्ज की है कि हसीना का मुकदमा “राजनीतिक बदले की भावना” से चलाया जा रहा है।
अवामी लीग ने यूनुस सरकार को ICC में घसीटा
अवामी लीग ने हेग स्थित ICC में याचिका दाखिल कर यूनुस सरकार पर मानवता-विरोधी अपराधों के आरोप लगाए हैं—जिसमें हत्याएं, मनमानी गिरफ्तारियां और राजनीतिक दमन शामिल हैं।
