पुलिस में नहीं हुआ भर्ती तो बना बॉक्सर –
राजस्थान के कोटपूतली-बहरोड़ जिले के बानसूर तहसील का चतरपुरा आढी गेली गांव, जहां एक साधारण किसान परिवार में जन्मा हरचंद आज पूरे देश में ‘हरी बॉक्सर’ के नाम से कुख्यात है. पिता गिरधारी जाट एक किसान हैं, और घर में 20 बीघा खेती योग्य जमीन है. हरी का बचपन आम ग्रामीण बच्चों की तरह बीता. पढ़ाई में वह ठीक था और खेलों में विशेष रुचि रखता था, खासकर बॉक्सिंग में. अब यूरोप के किसी देश में है, वहीं से अपना नेटवर्क चलाता है.
गांधी स्कूल बानसूर से 12वीं तक पढ़ाई करने के बाद उसने बानसूर कॉलेज से बीए किया. उसका सपना था कि वह सरकारी नौकरी में जाए. उसने राजस्थान पुलिस, आर्मी और एसएससी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की. जयपुर और अलवर में रहकर उसने चार-पांच साल तक लगातार मेहनत की, लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया और वह किसी भी परीक्षा में सफल नहीं हो पाया.
इसी बीच, बॉक्सिंग का उसका शौक धीरे-धीरे उसकी पहचान बन गया. जयपुर में बॉक्सिंग की कोचिंग लेने और देने के दौरान उसका मेलजोल ऐसे लोगों से हुआ जो अपराध की दुनिया में सक्रिय थे. शरीर से बलवान और आक्रामक स्वभाव के कारण हरी बॉक्सर को कोई भी सीधे चुनौती देने की हिम्मत नहीं करता था. लेकिन, यही ताकत और संगत उसे अपराध की तरफ खींचने लगी.
शुरुआत में वह छोटे-मोटे झगड़ों और मारपीट के मामलों में शामिल हुआ, लेकिन जल्द ही उसका नाम लूट, हत्या के प्रयास और गंभीर मारपीट जैसे अपराधों में आने लगा. जयपुर, अलवर, सीकर, धौलपुर और करौली समेत कई जिलों में उसके खिलाफ 10 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हो गए. पुलिस की नजरों में आने के बाद उस पर दबाव बढ़ा और 2022 में वह बानसूर से फरार हो गया.
फरारी के दौरान उसका संपर्क लॉरेंस बिश्नोई गैंग से हुआ. धीरे-धीरे वह इस गैंग का सक्रिय सदस्य बन गया. हाल ही में कनाडा में कॉमेडियन कपिल शर्मा के कैफे पर फायरिंग की घटना ने उसका नाम फिर सुर्खियों में ला दिया. इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर एक कथित ऑडियो वायरल हुआ, जिसमें खुद को हरी बॉक्सर बताने वाला शख्स कपिल शर्मा और पूरी फिल्म इंडस्ट्री को धमकाता सुना गया.
उस ऑडियो में साफ-साफ कहा गया कि जो भी सलमान खान के साथ काम करेगा, उसे बिना चेतावनी मार दिया जाएगा और मुंबई का माहौल खराब कर दिया जाएगा. हालांकि, इस ऑडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन ऑडियो में यह भी दावा किया गया कि बानसूर में शराब ठेकेदार सुनील उर्फ टुल्ली की हत्या में इस्तेमाल हथियार हरी बॉक्सर ने ही कृष्ण यादव ‘पहलवान’ को उपलब्ध कराए थे. एसपी देवेंद्र बिश्नोई ने भी मीडिया को बताया था कि कृष्ण पहलवान लॉरेंस गैंग का सदस्य होने की जांच की जा रही है.

अलग स्वाभाव का था हरी बॉक्सर
गांव के लोग बताते हैं कि हरी बॉक्सर का स्वभाव बचपन से ही अलग था. वह किसी से बेवजह उलझता नहीं था, लेकिन अगर कोई चुनौती देता तो पीछे नहीं हटता. कई बार उसने खुद कहा कि पुलिस की लगातार परेशानियों ने उसे पूरी तरह अपराध की राह पर धकेल दिया. करीब 36 साल के हरी बॉक्सर के परिवार में उसकी पत्नी, एक बेटा (कक्षा 9) और एक बेटी (कक्षा 10) हैं. उसके छोटे भाई विक्की का फाइनेंस का काम है. गांव में अब भी उसके पुराने किस्से सुनाए जाते हैं, लेकिन लोग यह सोचकर हैरान हैं कि कभी सरकारी नौकरी का सपना देखने वाला युवक आज देश के सबसे बड़े गैंगस्टरों में गिना जा रहा है.
पुलिस की पकड़ से दूर है हरी बॉक्सर
हरि बॉक्सर अपनी कहानी सपनों से शुरुआत करता है, लेकिन गलत संगत, असफलताएं और परिस्थितियां उसे उस राह पर ले जाती हैं, जहां से वापसी लगभग नामुमकिन हो जाती है. अब हरी बॉक्सर पुलिस की पकड़ से बाहर है, लेकिन उसका नाम अपराध की दुनिया में दर्ज हो चुका है.