रावलपिंडी: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पीटीआई प्रमुख इमरान खान की स्थिति को लेकर देश में राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। अडियाला जेल में बंद खान से पिछले तीन हफ्तों से न तो परिवार को मुलाक़ात करने दी गई है और न ही उनके स्वास्थ्य या हालात के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी दी गई है। इस स्थिति ने समर्थकों और परिवार दोनों की चिंता बढ़ा दी है।
जेल में मुलाकात बंद, परिवार परेशान
खान की बहनों—अलीमा खान, नूरीन नियाज़ी और डॉ. उज़मा खान—ने 25 नवंबर को अडियाला जेल के बाहर 10 घंटे का शांतिपूर्ण धरना दिया। लेकिन पुलिस ने उन्हें जबरन हटाया, कई को घसीटा और लाठीचार्ज किया। अलीमा खान ने आरोप लगाया कि “हमारा एकमात्र अपराध भाई से मिलना चाहना है।”
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दिखा कि देर रात पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर पानी की बौछारें और लाठीचार्ज किया। महिला वकीलों और बुजुर्ग समर्थकों तक को नहीं छोड़ा गया।
PTI का आरोप — ‘इमरान को खतरा, सरकार सच छिपा रही’
PTI नेताओं ने दावा किया है कि इमरान खान को जानबूझकर सोलिटरी कन्फाइनमेंट में रखा गया है और सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर तथा शहबाज़ शरीफ सरकार उनके राजनीतिक प्रभाव को खत्म करना चाहते हैं।
सीनियर नेता गोहर अली खान ने इसे “राजनीतिक हत्या की साजिश” बताया, जबकि सीनेटर अल्लामा राजा नसीर अब्बास ने चेतावनी दी कि “जनता का धैर्य अब टूट रहा है।”
अफवाहों पर सरकार का खंडन
अफगानिस्तान टाइम्स सहित कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया आउटलेट्स ने इमरान खान की मौत से जुड़ी अफवाहें प्रकाशित कीं, जिसे पाकिस्तानी सरकार ने “पूरी तरह मनगढंत और फर्जी” बताया है।
जेल प्रशासन ने कोर्ट में कहा कि खान की सोशल मीडिया पोस्ट्स भी जेल से नहीं चलाई जा रहीं।
PTI समर्थकों का देश भर में उबाल
25–26 नवंबर की रात को हजारों PTI समर्थक जेल के बाहर इकट्ठा हो गए और “फ्री इमरान खान” तथा “असीम मुनीर हटाओ” के नारे लगाए। कई शहरों में युवा कार्यकर्ताओं ने मार्च निकाला।
सरकार ने अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए, जिसके बाद बातचीत के जरिए धरना खत्म किया गया।
पृष्ठभूमि
इमरान खान अगस्त 2023 से कई भ्रष्टाचार मामलों में जेल में बंद हैं। PTI का कहना है कि परिवार, वकील और डॉक्टर से मुलाकात रोकना संयुक्त राष्ट्र के नेल्सन मंडेला नियमों का उल्लंघन है।
राजनीतिक माहौल गरमाया
पाकिस्तान पहले ही आर्थिक संकट और महंगाई से जूझ रहा है। ऐसे में इमरान खान के समर्थकों के सड़क पर उतरने से राजनीतिक टकराव और बढ़ गया है।
