राजस्थान सरकार के प्रशासनिक सुधार एवं समन्वय विभाग ने सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए बुधवार को किशनगढ़ उपखंड में एक औचक निरीक्षण किया. शासन सचिवालय, जयपुर से मिले निर्देशों पर की गई इस कार्रवाई में कई सरकारी कार्यालयों में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं. इंस्पेक्शन टीम का नेतृत्व उप शासन सचिव सूर्य बहादुर वर्मा ने किया. टीम सुबह 9:45 बजे किशनगढ़ पहुंची और उसने तहसील कार्यालय, एसडीएम कार्यालय, वाणिज्य कर विभाग, सरकारी अस्पताल और पीडब्ल्यूडी जैसे प्रमुख विभागों की कार्यप्रणाली और उपस्थिति रजिस्टर की जांच की.
43 रजिस्टरों में चौंकाने वाले आंकड़े
टीम ने कुल 43 उपस्थिति रजिस्टरों की जांच की, जिसमें चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए. जांच में शामिल 34 गजेटेड ऑफिसर में से केवल 20 ही अपनी सीट पर मिले, जो कि 58.82% उपस्थिति थी. यानी 14 अधिकारी गायब थे. वहीं, नॉन गजेटेड कर्मचारियों के मामले में रिकॉर्ड और भी खराब थे. 196 कर्मचारियों में से सिर्फ 67 कर्मचारी ही ड्यूटी पर पाए गए. उनकी उपस्थिति मात्र 34.18% रही. इसका मतलब है कि 129 कर्मचारी काम पर नहीं थे. यह चौंकाने वाला आंकड़ा बताता है कि सरकारी दफ्तरों में काम को लेकर कितनी लापरवाही बरती जा रही है.
प्रशासनिक सुधार विभाग की टीम ने इस गंभीर लापरवाही पर सख्त रुख अपनाया है. अनुपस्थित पाए गए सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के लिए एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जिसे उच्च अधिकारियों को भेजा जाएगा. इसके अलावा, निरीक्षण के दौरान कई कार्यालयों में रिकॉर्ड भी अव्यवस्थित पाए गए. टीम ने स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य में भी इस तरह की आकस्मिक जांच जारी रहेंगी, ताकि सरकारी कामकाज को सुधारा जा सके और जनता के लिए बेहतर सेवा सुनिश्चित की जा सके.
इस कार्रवाई का उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों के बीच जवाबदेही की भावना को बढ़ाना है, ताकि आम जनता को समय पर और बिना किसी परेशानी के सरकारी सेवाओं का लाभ मिल सके. यह कदम सरकार की कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.
